नई दिल्ली: पिछले 21 दिनों से जंतर-मंतर पर अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल कर रहे लद्दाखी कार्यकर्ता सोनम वांगचुक को शनिवार (18 जुलाई 2026) को दिल्ली पुलिस ने हिरासत में ले लिया। उनके स्वास्थ्य में गिरावट के कारण उन्हें तुरंत सफदरजंग अस्पताल के आपातकालीन वार्ड में भर्ती कराया गया है।
क्या है पूरा मामला?
सोनम वांगचुक NEET परीक्षा में कथित अनियमितताओं को लेकर केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान से इस्तीफे की मांग कर रहे थे। 28 जून से शुरू हुई उनकी इस हड़ताल का आज 21वां दिन था। रिपोर्ट्स के अनुसार, 19 दिनों में उनका वजन 9 किलो से अधिक कम हो गया था और उनका सामूहिक शारीरिक द्रव्यमान लगभग 20% घट गया था।
पुलिस और अदालत का पक्ष
दिल्ली पुलिस ने इस कार्रवाई को दिल्ली हाईकोर्ट के आदेशों का पालन बताते हुए कहा है कि मुख्य न्यायाधीश देवेंद्र कुमार उपाध्याय और न्यायमूर्ति तेजस कारिया की खंडपीठ ने हाल ही में सुनवाई के दौरान कहा था कि “हर नागरिक का जीवन अनमोल है” और सरकार को वांगचुक के स्वास्थ्य की दैनिक निगरानी सुनिश्चित करने के निर्देश दिए थे। पुलिस के अनुसार, चिकित्सीय सलाह और कोर्ट के आदेश के बाद ही उन्हें अस्पताल ले जाया गया।
जंतर-मंतर पर तनाव और आरोप
सोनम वांगचुक को अस्पताल ले जाते समय जंतर-मंतर पर अफरा-तफरी की स्थिति उत्पन्न हो गई। समर्थकों ने आरोप लगाया कि पुलिस ने उनके साथ बल प्रयोग किया। वरिष्ठ अधिवक्ता प्रशांत भूषण ने सोशल मीडिया पर इस कार्रवाई की निंदा करते हुए इसे सरकार के इशारे पर की गई कार्रवाई बताया है। वहीं, अभिजीत दिपके ने भी आरोप लगाया कि प्रदर्शनकारियों के साथ मारपीट की गई और उन्हें जबरन हटाया गया।
स्वयं सोनम वांगचुक ने भी सोशल मीडिया पर एक संदेश साझा कर दावा किया कि उन्हें पीटा गया है और वे इस समय दिल्ली पुलिस की हिरासत में हैं।
पुलिस की अपील
दिल्ली पुलिस ने दावा किया है कि उन्होंने अधिकतम संयम बरतते हुए स्थिति को सुरक्षित संभाला है। पुलिस ने प्रदर्शनकारियों से कानून-व्यवस्था बनाए रखने और जंतर-मंतर से शांतिपूर्वक हटने की अपील की है। अस्पताल के सूत्रों के अनुसार, फिलहाल वांगचुक होश में हैं और उनके वाइटल्स (शारीरिक गतिविधियाँ) स्थिर हैं।