नई दिल्ली: दिल्ली के सार्वजनिक परिवहन तंत्र को विश्वस्तरीय बनाने की दिशा में आज एक ऐतिहासिक कदम उठाया गया। दिल्ली मेट्रो के फेज-IV के तहत बहुप्रतीक्षित इंदरलोक–इंद्रप्रस्थ कॉरिडोर का विधिवत शिलान्यास किया गया। इस कार्यक्रम में दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने विशेष रूप से भाग लिया और इसे शहर के विकास के लिए एक ‘गेम चेंजर’ बताया।

विकास का नया अध्याय: मुख्यमंत्री का संदेश
शिलान्यास के अवसर पर मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने कहा कि दिल्ली को एक आधुनिक और वर्ल्डक्लास सार्वजनिक परिवहन व्यवस्था प्रदान करना उनकी सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है। उन्होंने कहा, “इंदरलोक–इंद्रप्रस्थ कॉरिडोर का शिलान्यास दिल्ली के लाखों नागरिकों के लिए एक सौगात है। हमारा उद्देश्य है कि पब्लिक ट्रांसपोर्ट हर दिल्लीवासी की पहली पसंद बने। पूर्व प्रधानमंत्री श्रद्धेय अटल बिहारी वाजपेयी जी का जो सपना था, उसे प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी के दूरदर्शी नेतृत्व में हम निरंतर आगे बढ़ा रहे हैं।”

परियोजना के मुख्य बिंदु
लंबाई और स्वरूप: यह 12.37 किलोमीटर लंबा कॉरिडोर पूरी तरह से भूमिगत होगा।
स्टेशन: इसमें 10 अत्याधुनिक स्टेशन शामिल होंगे।
कनेक्टिविटी का केंद्र: यह कॉरिडोर 7 विभिन्न मेट्रो लाइनों को आपस में जोड़कर दिल्ली की कनेक्टिविटी को एक ‘सुपर हब’ में बदल देगा।
लक्ष्य: परियोजना को दिसंबर 2030 तक पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है, ताकि जनता को जल्द से जल्द इसका लाभ मिल सके।
आम जनता के लिए सुविधा
मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने इस बात पर जोर दिया कि यह कॉरिडोर केवल एक मार्ग नहीं, बल्कि दिल्ली की जीवनरेखा को सशक्त करने का माध्यम है। इसके बन जाने से:
समय की बचत: पश्चिमी और मध्य दिल्ली के बीच की दूरी तय करना बहुत आसान और तेज़ हो जाएगा।
प्रमुख स्थलों तक पहुंच: नई दिल्ली रेलवे स्टेशन, सराय रोहिल्ला, दिल्ली सचिवालय, अरुण जेटली स्टेडियम और सेंट्रल विस्टा जैसे महत्वपूर्ण स्थानों तक पहुँचना सरल होगा।
ट्रैफिक और प्रदूषण में राहत: सड़क पर गाड़ियों का बोझ कम होगा, जिससे दिल्ली के प्रदूषण स्तर में भी सुधार आएगा।
यह कॉरिडोर न केवल शहर के इंफ्रास्ट्रक्चर को नई पहचान देगा, बल्कि दिल्लीवासियों के जीवन को अधिक सुरक्षित, सुगम और सुविधाजनक बनाने की दिशा में एक ठोस कदम है।