नई दिल्ली: दिल्ली के पर्यावरण को शुद्ध और सशक्त बनाने की दिशा में एक बड़ा कदम उठाते हुए केंद्र सरकार ने राजधानी के ‘रिज’ (Ridge) क्षेत्र के कायाकल्प की योजना शुरू की है। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने हाल ही में इस महत्वाकांक्षी परियोजना की घोषणा की, जिसका उद्देश्य दिल्ली की रिज को वास्तव में ‘हरित दिल्ली का फेफड़ा’ बनाना है।
जहरीले बबूल से मुक्ति गृह मंत्री ने इस दौरान रिज क्षेत्र में मौजूद विदेशी और आक्रामक प्रजाति के पेड़ों, विशेषकर ‘जहरीले बबूल’ (कीकर) पर चिंता व्यक्त की। उन्होंने कहा कि ये पेड़ दूर से देखने में तो हरियाली का भ्रम पैदा करते हैं, लेकिन वास्तव में ये स्थानीय पारिस्थितिकी तंत्र और पर्यावरण के अनुकूल नहीं हैं। ये पेड़ न केवल भूजल स्तर को प्रभावित करते हैं, बल्कि अन्य देशी वनस्पतियों के पनपने में भी बाधा उत्पन्न करते हैं।
तीन साल में बदलेगी रिज की तस्वीर इस मिशन के तहत, सरकार ने 5,000 हेक्टेयर रिज क्षेत्र को आधिकारिक रूप से ‘वन क्षेत्र’ घोषित किया है। अगले तीन वर्षों के भीतर, इस पूरे क्षेत्र से हानिकारक बबूलों को हटाकर वहां पीपल, बरगद, नीम, गुलर, अर्जुन और जामुन जैसे स्वदेशी और दीर्घायु वृक्ष लगाए जाएंगे। ये सभी पेड़ न केवल 100 वर्षों से अधिक समय तक जीवित रहते हैं, बल्कि ऑक्सीजन का एक बड़ा स्रोत भी माने जाते हैं।
पर्यावरण संरक्षण का बड़ा लक्ष्य यह पहल दिल्ली की वायु गुणवत्ता में सुधार और जैव विविधता को बढ़ावा देने के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण मानी जा रही है। सरकार का मानना है कि रिज का यह स्वरूप दिल्लीवासियों के लिए एक ‘प्राकृतिक फेफड़ा’ (Lungs of Delhi) साबित होगा। इस योजना के क्रियान्वयन से दिल्ली न केवल देखने में हरी-भरी दिखेगी, बल्कि इसका पर्यावरण भी अधिक टिकाऊ और सेहतमंद बनेगा। पर्यावरण विशेषज्ञों ने इस कदम का स्वागत करते हुए इसे दिल्ली के इकोलॉजिकल संतुलन के लिए मील का पत्थर बताया है।