नई दिल्ली। दिल्ली में अब संपत्ति पंजीकरण की व्यवस्था और अधिक पारदर्शी, जवाबदेह और नियमसम्मत होगी। मुख्यमंत्री श्रीमती रेखा गुप्ता के विशेष निर्देश पर जनरल पावर ऑफ अटॉर्नी (जीपीए) से जुड़े मामलों की जांच और निगरानी के लिए सख्त नियम लागू कर दिए गए हैं।
इस नई व्यवस्था के तहत सबसे अहम बदलाव यह है कि रक्त संबंधियों के अलावा अन्य व्यक्तियों के पक्ष में किए जाने वाले सभी जीपीए मामलों की अनिवार्य रूप से जांच होगी। ऐसे हर मामले को उचित स्टांप शुल्क निर्धारण के लिए कलेक्टर ऑफ स्टांप के पास भेजना अनिवार्य कर दिया गया है।
सरकार का स्पष्ट निर्देश है कि प्रत्येक जीपीए दस्तावेज की गहन जांच कर यह सुनिश्चित किया जाएगा कि बिक्री, कब्जा हस्तांतरण या मालिकाना हक से जुड़े प्रावधानों के अनुरूप ही उचित स्टांप शुल्क लागू हो। बिना उचित स्टांप शुल्क के भुगतान के ऐसे दस्तावेजों का पंजीकरण बिल्कुल नहीं किया जाएगा।
इसके अलावा कलेक्टर ऑफ स्टांप को अब 30 दिनों के भीतर कारण सहित आदेश जारी करना अनिवार्य होगा। वहीं पारदर्शिता बढ़ाने के लिए एक महीने के भीतर एक ऑनलाइन ट्रैकिंग प्रणाली विकसित की जाएगी, जिससे सभी मामलों की नियमित निगरानी सुनिश्चित हो सके।
सरकार ने साफ किया है कि नियमों का उल्लंघन करने वाले अधिकारियों के खिलाफ कड़ी अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाएगी। इस कदम का उद्देश्य पारदर्शी प्रशासन, सुरक्षित राजस्व संग्रहण और नागरिकों के हितों की रक्षा करना है। जानकारों के अनुसार इस नई व्यवस्था से संपत्ति विवादों में कमी आने और राजस्व चोरी पर लगाम लगने की उम्मीद है।
दिल्ली सरकार ने इस पूरी प्रक्रिया को लागू करने के लिए सभी संबंधित अधिकारियों को आवश्यक दिशा-निर्देश जारी कर दिए हैं।