बिना बहस के पास: लोकसभा ने भारी शोर-शराबे के बीच ट्रिब्यूनल रिफॉर्म्स बिल, 2026 को बिना किसी चर्चा के पारित कर दिया है।
राष्ट्रीय न्यायाधिकरण आयोग (एनटीसी) का गठबंधन: बिल में एक नई नियुक्ति (स्वतंत्र) आयोग – एनटीसी – का प्रावधान किया गया है, जो न्यायाधिकरण के अध्यक्ष और सदस्यों की नियुक्ति करेगा, उनके कार्यों की समीक्षा करेगा और शिकायतों का निवारण करेगा।
कार्यकाल में बदलाव: नए बिल में सदनों का कार्यकाल 4 साल से बढ़ाकर 5 साल कर दिया गया है और 50 साल से कम उम्र के व्यक्तियों की नियुक्ति पर लगी रोक हटा दी गई है।
पृष्ठभूमि: क्यों लाना पड़ा ये नया बिल?
यह विवाद पिछले साल 19 नवंबर 2025 को शुरू हुआ था, जब सुप्रीम कोर्ट ने मद्रास बार एसोसिएशन बनाम यूनियन ऑफ इंडिया मामले में ट्रिब्यूनल रिफॉर्म्स एक्ट, 2021 के मुख्य प्रावधानों (जैसे योग्यता, चयन प्रक्रिया, कार्यकाल और पुनर्नियुक्ति) को रद्द कर दिया था।
अदालत ने सख्त टिप्पणियां करते हुए कहा था कि 2021 का कानून उन पुराने प्रावधानों को दोहरा रहा था, जिन्हें सुप्रीम कोर्ट ने पहले ही असंवैधानिक घोषित कर दिया था। कोर्ट ने सरकार को एक स्वतंत्र राष्ट्रीय न्यायाधिकरण आयोग (एनटीसी) बनाने का निर्देश दिया था, ताकि नीतियों में पूरी पारदर्शिता बनी रहे।
नए ट्रिब्यूनल सुधार विधेयक, 2026 की मुख्य बातें
एनटीसी की संरचना: नए आयोग में एक अध्यक्ष, दो न्यायिक सदस्य और दो तकनीकी सदस्य होंगे। यह आयोग एक नेशनल ट्रिब्यूनल डेटा ग्रिड भी बनाएगा।
16 ट्रिब्यूनल पर असर: यह नया कानून नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (एनजीटी) सहित देश के 16 अलग-अलग ट्रिब्यूनल पर लागू होगा।
नियुक्ति नियम सुधार: अध्यक्ष और सदस्यों के लिए न्यूनतम आयु सीमा (50 साल से कम न होने की शर्त) को खत्म कर दिया गया है, जिससे योग्य युवाओं और अनुभवी लोगों के लिए रास्ता और आसान हो जाएगा।
सरकार और विपक्ष का रुख
सरकार का पक्ष: कानून मंत्री अर्जुन राम मेघवाल ने स्पष्ट किया कि किसी भी ट्रिब्यूनल के अधिकार क्षेत्र में कोई बदलाव नहीं किया गया है। उन्होंने कहा कि इस बिल का मुख्य उद्देश्य नियुक्तियों में स्वतंत्रता और पारदर्शिता को और मजबूत बनाना है।
विपक्ष का विरोध: कांग्रेस नेता जयराम रमेश, जो 2021 के कानून के मुख्य चैलेंजर्स में से एक थे, का कहना है कि एनजीटी (नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल) सरकार के निशाने पर है। उन्होंने उम्मीद जताई कि इस नए कदम के बाद सभी न्यायाधिकरण – खासकर एनजीटी – अपनी ताकत को वापस पा सकेंगे और बिना किसी दबाव के अपना काम कर सकेंगे।