नई दिल्ली: राजधानी के बुनियादी ढांचे और पर्यावरण को संवारने के लिए चल रहे व्यापक सुधारों को और गति देते हुए, दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने कल दिल्ली सचिवालय में एक महत्वपूर्ण प्रेस कॉन्फ्रेंस को संबोधित किया। इस दौरान उन्होंने शहर भर में हासिल किए गए प्रमुख संरचनात्मक सुधारों, प्रशासनिक बदलावों और विकास से जुड़े मील के पत्थरों पर विस्तार से प्रकाश डाला।
मुख्यमंत्री ने अपने मंत्रिमंडल के वरिष्ठ सहयोगियों की मौजूदगी में इस बात पर जोर दिया कि दिल्ली दशकों पुरानी नागरिक और ढांचागत समस्याओं को पीछे छोड़कर एक नए युग में प्रवेश कर रही है। शहरी चुनौतियों का उल्लेख करते हुए उन्होंने बताया कि राजधानी के कई आवासीय इलाकों में पिछले 40 से 50 साल पुराना जर्जर सीवर और ड्रेनेज नेटवर्क नागरिकों की मुसीबत को बढ़ा रहा था। इन पुरानी और चोक हो चुकी लाइनों को अब चरणबद्ध तरीके से बदला जा रहा है और नए सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट (STP) का निर्माण तेजी से किया जा रहा है, ताकि गंदा पानी सीधे यमुना नदी में ना गिरे।
प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान साझा की गई प्रमुख बातें निम्नलिखित हैं:
वित्तीय सहायता और अंतर्राष्ट्रीय साझेदारी: बुनियादी ढांचे को मजबूत करने के लिए भारी वित्तीय संसाधन जुटाए गए हैं। सरकार ने वित्त मंत्रालय के सहयोग से एशियाई विकास बैंक (ADB) से लगभग ₹2,500 करोड़ का महत्वपूर्ण ऋण प्राप्त किया है। यह इस बात का प्रमाण है कि अंतरराष्ट्रीय एजेंसियां भी अब राजधानी की विकास योजनाओं पर पूरा भरोसा जता रही हैं।
जल नेटवर्क का आधुनिकीकरण और नुकसान पर लगाम: पानी की बर्बादी रोकने और हर घर तक सुचारू जलापूर्ति के लिए दक्षिण-पश्चिम क्षेत्र सहित विभिन्न जोन में लगभग ₹7,096 करोड़ का बड़ा वित्तीय आवंटन किया गया है। इसके तहत डिस्ट्रिक्ट मीटर्ड एरिया (DMA) मीटरिंग लागू की जा रही है ताकि लीक और पानी की चोरी को रोका जा सके।
कर्मचारी सशक्तिकरण और संस्थागत सुधार: दिल्ली जल बोर्ड (DJB) की कार्यप्रणाली में पारदर्शिता लाने के लिए बड़े प्रशासनिक सुधार किए गए हैं। लगभग 18,000 विभागीय कर्मचारियों को आधुनिक डिजिटल और कैशलेस कार्यप्रणाली से जोड़ा गया है, जिससे कामकाज में तेजी और जवाबदेही दोनों सुनिश्चित हो रही हैं।
अनधिकृत कॉलोनियों का एकीकरण: शहर के दूर-दराज और अनधिकृत इलाकों को मुख्य सीवर और जल ग्रिड से जोड़ने के लिए युद्ध स्तर पर काम चल रहा है, जिससे आम जनता को वर्षों पुरानी नरकीय स्थिति से मुक्ति मिल सके।
प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि ‘स्वच्छ यमुना’ और ‘हर घर नल से जल’ अब केवल नारे नहीं बल्कि मिशन-मोड पर चलने वाले राष्ट्रीय अभियान बन चुके हैं। तय समय सीमा के भीतर इन सभी परियोजनाओं को धरातल पर उतारने के लिए अधिकारियों को सख्त निर्देश दिए गए हैं, ताकि आने वाले समय में दिल्लीवासियों को एक स्वच्छ, स्वस्थ और आधुनिक शहरी पारिस्थितिकी तंत्र मिल सके।