लखनऊ पुलिस ने Netflix की विवादित वेब सीरीज ‘घूसखोर पंडत’ के खिलाफ दर्ज की FIR, धार्मिक-जातिगत भावनाओं को ठेस पहुंचाने का आरोप
लखनऊ, 6 फरवरी 2026: उत्तर प्रदेश पुलिस ने OTT प्लेटफॉर्म Netflix पर प्रसारित/आगामी वेब सीरीज ‘घूसखोर पंडत (Ghooskhor Pandat)’ के खिलाफ सख्त कार्रवाई करते हुए हजरतगंज थाने में FIR दर्ज की है। पुलिस कमिश्नरेट लखनऊ द्वारा जारी प्रेस नोट (प्रेस नोट संख्या-224, दिनांक 06.02.2026) के अनुसार, मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के निर्देश पर यह कदम उठाया गया है।
फिल्म/सीरीज के डायरेक्टर, प्रोड्यूसर और पूरी क्रिएटिव टीम के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया गया है। आरोप है कि सीरीज का शीर्षक ‘घूसखोर पंडत’ और कुछ दृश्य/संवाद एक विशेष समुदाय (विशेष रूप से ब्राह्मण/पंडित समाज) की भावनाओं को आहत करते हैं, जातिगत अपमान करते हैं तथा समाज में वैमनस्य और अशांति फैलाने की कोशिश करते हैं।
प्रेस नोट के प्रमुख बिंदु:
- सोशल मीडिया और OTT प्लेटफॉर्म्स पर वायरल हुए कंटेंट के आधार पर शिकायतें मिलीं।
- फिल्म का शीर्षक ‘घूसखोर पंडत’ को ब्राह्मण/पंडित समाज के प्रति अपमानजनक माना गया, जिसमें ‘पंडत’ शब्द को भ्रष्टाचार से जोड़ा गया है।
- विभिन्न सामाजिक संगठनों ने विरोध जताया, शांति भंग करने का प्रयास बताया।
- पुलिस ने इसे सामाजिक सौहार्द बिगाड़ने और धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचाने वाला मामला माना।
- FIR के तहत भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 196 (समूहों के बीच वैमनस्य), 299 (धार्मिक भावनाओं को आहत करने वाले कृत्य), 352 (शांति भंग की आशंका) आदि के साथ IT एक्ट की धारा 66 भी लगाई गई है।
- पुलिस ने स्पष्ट किया कि किसी भी समुदाय की भावनाओं से खिलवाड़ या कानून-व्यवस्था बिगाड़ने वालों के खिलाफ जीरो टॉलरेंस नीति अपनाई जाएगी।
यह विवाद तब और तेज हो गया जब फिल्म के टीजर और प्रचार सामग्री सोशल मीडिया पर वायरल हुईं। ब्राह्मण समाज सहित कई संगठनों ने इसका विरोध किया, बैन की मांग की और सड़कों पर प्रदर्शन भी हुए। कुछ रिपोर्ट्स में मनोज बाजपेयी को मुख्य भूमिका में दिखाया गया है, जहां एक पुलिस अधिकारी की भ्रष्ट छवि को ‘पंडत’ कहकर संबोधित किया जाता है, जिसे जातिगत अपमान के रूप में देखा जा रहा है।
पुलिस ने जांच शुरू कर दी है और आगे की कार्रवाई की जा रही है। यह मामला OTT प्लेटफॉर्म्स पर कंटेंट नियंत्रण और संवेदनशील मुद्दों पर बढ़ती सख्ती को दर्शाता है।
दिल्ली हाई कोर्ट में भी इस फिल्म के खिलाफ याचिका दायर की गई है, जबकि BSP प्रमुख मायावती समेत कई राजनीतिक हस्तियों ने भी इसका विरोध जताया है।