दिल्ली, 8 फरवरी 2026: दिल्ली के कराला क्षेत्र स्थित रुपाली एन्क्लेव एवं आनंदपुर धाम बस्ती में भव्य हिंदू सम्मेलन का आयोजन किया गया। यह कार्यक्रम स्थानीय परिवारों के उत्साह और सहयोग से संपन्न हुआ, जिसमें बस्ती के बच्चों, युवाओं और प्रबुद्ध व्यक्तियों ने बढ़-चढ़कर भाग लिया। यह कार्यक्रम हिंदू समाज की सांस्कृतिक धरोहर, सामाजिक एकजुटता और बस्ती की युवा पीढ़ी की प्रतिभा को सम्मान देने का एक शानदार मंच साबित हुआ।

सम्मेलन में बड़ी संख्या में स्थानीय निवासी, युवा, महिलाएं और बच्चे शामिल हुए। कार्यक्रम की शुरुआत पारंपरिक गणेश वंदना से की, जिसने पूरे माहौल को भक्ति और उत्साह से भर दिया। कार्यक्रम के अध्यक्ष श्री नरेंद्र जी ने की व उपाध्यक्ष श्री मृत्यंजय झा जी रहे। मंच पर बस्ती के अन्य व्यक्तियों को भी सम्मानित किया गया, जिनमें माँ बगुलामुखी मंदिर और आनंदपुर धाम के स्थानीय मंदिर की पुजारी भी शामिल थे।
कार्यक्रम की शुरुआत श्री लीलाधर शास्त्री जी के भजन से हुई, जिसके बाद विभिन्न सांस्कृतिक कार्यकर्म प्रस्तुत किये गए। बस्ती के विद्यार्थियों ने समाज सेविका अदिति जी के निर्देशन में धार्मिक, देशभक्ति गीत, नृत्य, लघु नाटिका और अपने अन्य कलात्मक प्रदर्शन से दर्शकों को आनंदित किया। जिसके बाद राघव वैलनेस सेंटर से आये हुए प्राकृतिक चिकित्सको ने स्वास्थ्य और स्वस्थ जीवन के ऊपर एक प्रस्तुति दी।

इसके बाद मुख्य उद्बोधन सत्र शुरू हुआ, जिसमें समाज के प्रतिष्ठित समाजसेवी नरेंद्र माथुर जी ने हिन्दू समाज और हिंदुत्व पर अपने गहन विचार लोगों के समक्ष रखे और उन्हें सनातन मूल्यों को दैनिक जीवन में अपनाने की अपील की। जिसके बाद श्रीनिवास जी ने राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के पंच परिवर्तन (1) स्व का बोध अर्थात स्वदेशी, (2) नागरिक कर्तव्य, (3) पर्यावरण, (4) सामाजिक समरसता एवं (5) कुटुम्ब प्रबोधन के विषय में बताते हुए हिंदू समाज में समरसता को अपनाते हुए स्व का बोध अर्थात स्वदेशी, कुटुंब प्रबोधन, जाति-भेद मिटाने, संगठित होकर राष्ट्रहित में कार्य करने और नागरिक कर्तव्यों का पालन करने, पर्यावरण की रक्षा पर जोर दिया और उन्हें अपने जीवन में उतारने के लिए लोगों को प्रेरित किया।

यह सम्मेलन राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के शताब्दी वर्ष के संदर्भ में भी महत्वपूर्ण रहा, जहां संस्कार, सेवा और संगठन के माध्यम से समाज को मजबूत बनाने का संकल्प दोहराया गया। ऐसे आयोजन न केवल स्थानीय स्तर पर हिंदू समाज को एकजुट करते हैं, बल्कि सांस्कृतिक गौरव और राष्ट्रीय चेतना को भी मजबूती प्रदान करते हुए भावी पीढ़ी को संस्कार और देशभक्त भी बनाते हैं।
इस कार्यकर्म के मंच संचालन की जिम्मेदारी श्री एस एस राघव जी और श्रीनिवास जी ने कुशलतापूर्वक निभाई। आयोजन की समग्र व्यवस्था श्रीमान पवन पटेल जी ने स्थानीय कार्यकर्ताओं के सहयोग से सफलतापूर्वक संभाली। कार्यक्रम में विशेष आकर्षण रहा बच्चों के द्वारा प्रस्तुत नृत्य, गायन और नाटिका, जिसमें भाग लेने वाले सभी बालक-बालिकाओं को ट्राफी देकर पुरस्कृत और सम्मानित किया गया।

समापन के बाद प्रसाद वितरण की उत्तम व्यवस्था की गई, जिससे सभी श्रद्धालु संतुष्ट हुए।
यह सम्मेलन स्थानीय स्तर पर हिन्दू समाज में सकारात्मक ऊर्जा और एकजुटता का संदेश देने में सफल रहा। आयोजकों ने बताया कि ऐसे कार्यक्रम भविष्य में भी नियमित रूप से आयोजित किए जाएंगे ताकि युवा पीढ़ी अपनी जड़ों से जुड़ी रहे।