रहेजा डेवलपर्स की मुसीबतें बढ़ीं: NCLT ने दिवाला प्रक्रिया शुरू करने का दिया आदेश

गुरुग्राम: गुरुग्राम के सेक्टर-78 स्थित बहुचर्चित ‘रेवांता’ रिहायशी प्रोजेक्ट के खरीदारों के लिए एक बड़ी राहत भरी खबर सामने आई है। राष्ट्रीय कंपनी विधि न्यायाधिकरण (NCLT) की नई दिल्ली स्थित प्रधान पीठ ने रहेजा डेवलपर्स लिमिटेड के खिलाफ दिवाला समाधान प्रक्रिया (Insolvency Resolution Process) शुरू करने की याचिका को स्वीकार कर लिया है। न्यायाधिकरण ने इस मामले में प्रथम दृष्टया माना है कि कंपनी ने फ्लैट खरीदारों को समय पर कब्जा देने का अपना वादा पूरा नहीं किया है।

क्या है पूरा मामला? यह याचिका सुरिंदर अग्रवाल समेत 176 खरीदारों द्वारा दायर की गई थी, जिनके पास इस प्रोजेक्ट में कुल 99 रिहायशी यूनिट्स हैं। याचिकाकर्ताओं का आरोप है कि उन्होंने फ्लैट की कुल कीमत का 90 से 95 प्रतिशत हिस्सा यानी लगभग 137 करोड़ रुपये से अधिक की राशि वर्षों पहले ही जमा कर दी थी, लेकिन लंबे इंतजार के बाद भी उन्हें फ्लैट का मालिकाना हक नहीं मिल पाया।

वादे और हकीकत का अंतर कंपनी ने वर्ष 2011 में इस परियोजना की शुरुआत की थी। उस समय स्वतंत्र फ्लोर का कब्जा 36 माह और ऊंची इमारतों (हाई-राइज) में बने फ्लैट्स का कब्जा 48 माह के भीतर देने का वादा किया गया था। यहाँ तक कि हरियाणा रियल एस्टेट रेगुलेटरी अथॉरिटी (HRERA) के समक्ष भी प्रोजेक्ट पूरा करने के लिए 31 जुलाई 2022 की समय-सीमा तय की गई थी। इसके बावजूद खरीदारों को न तो कब्जा मिला और न ही देरी के लिए कोई मुआवजा दिया गया।

कंपनी का पक्ष और न्यायाधिकरण का निर्णय रहेजा डेवलपर्स ने अपनी दलील में बाहरी आधारभूत सुविधाओं (सड़क, बिजली, पानी, सीवर) की कमी और प्रशासनिक बाधाओं का हवाला देते हुए परियोजना में देरी का बचाव किया। कंपनी ने खुद को आर्थिक रूप से सक्षम बताते हुए दावा किया कि प्रोजेक्ट काफी हद तक पूरा हो चुका है। हालांकि, NCLT ने सभी तथ्यों और अभिलेखों की समीक्षा करने के बाद कंपनी की दलीलों को दरकिनार करते हुए दिवाला प्रक्रिया शुरू करने का आदेश जारी कर दिया।

खरीदारों के लिए उम्मीद की किरण इस फैसले को गुरुग्राम में रहेजा डेवलपर्स के खिलाफ चल रहे विवादों के बीच एक महत्वपूर्ण मोड़ माना जा रहा है। प्रोजेक्ट के आवंटी अर्जुन पुनिया ने बताया कि पिछले 15 वर्षों से लंबित इस मामले में ढाई साल की लंबी कानूनी लड़ाई के बाद आवंटियों के पक्ष में फैसला आया है। इस आदेश के बाद अब खरीदारों को अपनी जमा पूंजी वापस मिलने या फ्लैट का कब्जा पाने की उम्मीद की एक नई किरण जगी है।

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