एलन मस्क से भारतीय एग्जीक्यूटिव का सवाल : भारत में एक्स प्रीमियम पर जीएसटी क्यों नहीं ?

नई दिल्ली, 14 अक्टूबर। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स के मालिक एलन मस्क एक बार फिर भारत में चर्चा के केंद्र में हैं। इस बार वजह स्टारलिंक नहीं, बल्कि एक्स प्रीमियम सब्सक्रिप्शन पर वस्तु एवं सेवा कर यानी जीएसटी को लेकर उठा विवाद है। भारतीय टेक एग्जीक्यूटिव प्रकाश आडवाणी ने सार्वजनिक रूप से मस्क से पूछा है कि भारत में बेचे जा रहे एक्स प्रीमियम और अन्य पेड सब्सक्रिप्शन के इनवॉयस में स्थानीय कर जीएसटी क्यों शामिल नहीं है। उनका यह पोस्ट देखते ही देखते वायरल हो गया और अब कर अनुपालन को लेकर देशभर में बहस छिड़ गई है।

ओलिव इंटेलिजेंस के चीफ ग्रोथ ऑफिसर प्रकाश आडवाणी एआई इंफ्रास्ट्रक्चर, एआई डेटा सेंटर, ओपन सोर्स तकनीक और सस्टेनेबिलिटी के क्षेत्र में काम करते हैं। उन्होंने एक्स पर मस्क, एक्स और एक्स कॉर्प इंडिया को टैग करते हुए लिखा कि मुझे यह देखकर आश्चर्य हुआ कि भारत में प्रीमियम और अन्य पेड सब्सक्रिप्शन के लिए एक्स के इनवॉयस में स्थानीय कर जीएसटी शामिल नहीं है। यदि एक्स भारत के यूजर्स से राजस्व कमा रहा है, तो उसे अन्य डिजिटल सेवा प्रदाताओं की तरह भारतीय कर कानूनों का पालन करना चाहिए और जीएसटी वसूल कर जमा करना चाहिए। उन्होंने मस्क से स्पष्टीकरण मांगा है कि भारत में पेड सब्सक्रिप्शन पर जीएसटी क्यों नहीं लिया जा रहा है।

आडवाणी ने अपने दावे के समर्थन में इनवॉयस का ब्योरा भी साझा किया। उनके अनुसार ब्राउजर या वेब के जरिए खरीदे गए सब्सक्रिप्शन का इनवॉयस आयरलैंड से बनता है और उसमें जीएसटी का कोई उल्लेख नहीं होता, जबकि गूगल प्ले के जरिए उसी सब्सक्रिप्शन की खरीद पर जीएसटी जोड़ा जाता है। इसी अंतर ने विवाद को और गहरा कर दिया है। कई चार्टर्ड अकाउंटेंट, स्टार्टअप संस्थापकों और यूजर्स ने भी अपने इनवॉयस साझा कर कहा कि उन्हें भी बिना जीएसटी वाला बिल मिला है।

भारत में विदेशी डिजिटल कंपनियों के लिए ओआईडीएआर यानी ऑनलाइन इंफॉर्मेशन डेटाबेस एक्सेस एंड रिट्रीवल नियम लागू हैं। इसके तहत भारत में ऑनलाइन सब्सक्रिप्शन, विज्ञापन, क्लाउड और स्ट्रीमिंग जैसी सेवाएं बेचने वाली विदेशी कंपनियों को भारत में पंजीकरण कराकर भारतीय ग्राहकों से अठारह प्रतिशत जीएसटी वसूलना अनिवार्य है। गूगल, एपल, मेटा, नेटफ्लिक्स, स्पॉटिफाई और माइक्रोसॉफ्ट जैसी कंपनियां पहले से ही भारतीय इनवॉयस में जीएसटी जोड़ती हैं और अपना जीएसटीआईएन दर्शाती हैं। ऐसे में सवाल उठ रहा है कि एक्स ने अब तक यह अनुपालन क्यों नहीं किया।

सोशल मीडिया पर प्रतिक्रियाएं दो हिस्सों में बंटी हैं। एक वर्ग का कहना है कि यदि करोड़ों का राजस्व भारत से कमाया जा रहा है तो कर भी भारत में ही जमा होना चाहिए और डीजीजीआई व सीबीआईसी को इसकी जांच कर ऑडिट करना चाहिए। वहीं दूसरा वर्ग कह रहा है कि यदि एक्स जीएसटी जोड़ता है तो एक्स प्रीमियम बेसिक, प्रीमियम और प्रीमियम प्लस की कीमतें भारतीय यूजर्स के लिए अठारह प्रतिशत तक बढ़ जाएंगी।

फिलहाल एलन मस्क या एक्स कॉर्प इंडिया की ओर से इस पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है। यह मामला ऐसे समय में सामने आया है जब स्टारलिंक की लाइसेंसिंग, डेटा स्थानीयकरण और विदेशी स्वामित्व वाली दूरसंचार व्यवस्था को लेकर भी बहस चल रही है। अब सबकी नजर इस पर है कि क्या एक्स सफाई देता है, क्या वेब कीमतों में जीएसटी जोड़कर संशोधन करता है और क्या कर अधिकारी इस मामले में स्वत संज्ञान लेंगे।

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