मेरठ, 14 अक्टूबर। पूरे देश को दहला देने वाले मेरठ के चर्चित नीले ड्रम हत्याकांड में बुधवार को अदालत ने ऐतिहासिक फैसला सुनाया। जिला एवं सत्र न्यायाधीश अरविंद कुमार मिश्र की अदालत ने इस जघन्य हत्याकांड के दोनों दोषियों—मृतक की पत्नी मुस्कान रस्तोगी और उसके प्रेमी साहिल शुक्ला—को मृत्युदंड यानी फांसी की सजा सुनाई। इसके साथ ही अदालत ने दोनों पर क्रमशः 50 हजार और 20 हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया। सजा का ऐलान होते ही अदालत परिसर के बाहर मौजूद मृतक के परिजन भावुक हो गए और उन्होंने इसे न्याय की जीत बताया।
बुधवार को सजा पर सुनवाई के लिए दोनों दोषियों को जिला कारागार से वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से अदालत के समक्ष पेश किया गया। सजा सुनाने से पहले अदालत ने दोनों से उनके स्वास्थ्य, जेल की दिनचर्या और अंतिम पक्ष के बारे में पूछा। अदालत ने जब पूछा कि सजा को लेकर उन्हें कुछ कहना है, तो दोनों ने कहा कि उन्हें कुछ नहीं कहना है। इसके बाद अभियोजन और बचाव पक्ष की दलीलें सुनने के बाद अदालत ने दोनों को मृत्युदंड की सजा सुनाई। फैसला सुनते ही मुस्कान फूट-फूटकर रोने लगी, जबकि साहिल भी भावुक होकर सिर झुकाए रोता रहा।
अदालत ने अपने फैसले में कहा कि अपराधी को उसके अपराध के अनुरूप सजा देना भी धर्म का कार्य है। अदालत ने महाभारत का उल्लेख करते हुए कहा कि धर्म की रक्षा के लिए अधर्म का नाश आवश्यक है। अदालत ने माना कि यह अपराध विरलतम से विरलतम श्रेणी में आता है, इसलिए दोनों दोषियों को मृत्युदंड दिया जाना ही न्यायसंगत है। अभियोजन पक्ष का कहना है कि अपराध की गंभीरता, क्रूरता और शव को छिपाने के अमानवीय तरीके को देखते हुए यह फैसला पूरे देश के लिए एक नजीर बनेगा। हाल के दिनों में इस प्रकार के अपराधों में हुई वृद्धि पर इस फैसले से लगाम लगने की उम्मीद है।
गौरतलब है कि अदालत ने गत 30 सितंबर को ही मुस्कान और साहिल को सौरभ राजपूत की हत्या का दोषी करार दिया था। इसके बाद सजा के बिंदु पर सुनवाई के लिए 14 अक्टूबर की तारीख तय की गई थी। बुधवार को जिला शासकीय अधिवक्ता कृष्ण कुमार चौबे ने अभियोजन पक्ष की ओर से प्रभावी पैरवी करते हुए दोनों के लिए मृत्युदंड की मांग की। उन्होंने अदालत के समक्ष दलील दी कि पत्नी मुस्कान ने अपने प्रेमी साहिल के साथ मिलकर सुनियोजित साजिश के तहत अपने पति की नृशंस हत्या की और साक्ष्य छिपाने के लिए शव के टुकड़े कर उन्हें सीमेंट से भरे नीले ड्रम में डाल दिया। यह कृत्य मानवता को शर्मसार करने वाला है, इसलिए दोषियों को अधिकतम सजा दी जानी चाहिए।
वहीं बचाव पक्ष की अधिवक्ता रेखा जैन ने मुस्कान की दो छोटी बेटियों के भविष्य और पालन-पोषण का हवाला देते हुए अदालत से नरमी बरतने और कम सजा देने की अपील की थी। मुस्कान ने भी अदालत से कहा कि उसकी दो बेटियां हैं, उनका ख्याल रखा जाए। जेल प्रशासन के अनुसार मुस्कान पिछले तीन-चार दिनों से अपनी सात साल की बड़ी बेटी से मिलने की गुजारिश कर रही थी, लेकिन बच्ची को जेल नहीं लाया गया। फैसले से पहले की रात दोनों बेचैन रहे, उन्होंने ठीक से खाना भी नहीं खाया और सो भी नहीं पाए।
मृतक सौरभ राजपूत की मां रेणू देवी और भाई बबलू उर्फ राहुल ने अदालत से पहले ही दोनों दोषियों को फांसी देने की मांग की थी। फैसला आने के बाद भाई राहुल ने कहा कि हम शुरू से ही यही उम्मीद लगाए थे कि हमें इंसाफ मिलेगा। हमने शुरू से एक ही मांग रखी थी कि जो उन्होंने हमारे भाई के साथ किया, वही उनके साथ हो। परिवार ने कहा कि आज हमारे भाई की आत्मा को शांति मिली है।
यह हत्याकांड अपनी क्रूरता के कारण देशभर में चर्चा का विषय बना था। ब्रह्मपुरी के इंद्रानगर निवासी सौरभ राजपूत ने वर्ष 2016 में गौरीपुरा निवासी मुस्कान रस्तोगी से प्रेम विवाह किया था। वर्ष 2019 में विवाद के बाद दोनों अलग हो गए थे, उसी वर्ष बेटी पीहू का जन्म हुआ। इसी दौरान मुस्कान की नजदीकियां स्कूल के सहपाठी साहिल शुक्ला से बढ़ गईं। सौरभ लंदन में नौकरी करता था। 24 फरवरी 2025 को वह नौकरी छोड़कर घर लौटा था। आरोप है कि 3 मार्च की रात मुस्कान ने कोफ्ते की सब्जी में नशीली दवा मिलाकर सौरभ को बेहोश किया, फिर साहिल को बुलाकर उसकी हत्या कर दी। इसके बाद वॉशरूम में शव के टुकड़े कर उसे नीले ड्रम में भरकर ऊपर से सीमेंट डाल दिया गया। हत्या के बाद दोनों हिमाचल घूमने चले गए। 18 मार्च 2025 को भाई की शिकायत पर पुलिस ने जांच की तो घर से ड्रम में जमा शव बरामद हुआ। 19 मार्च को दोनों को गिरफ्तार कर जेल भेजा गया।
पुलिस ने 12 मई 2025 को आरोपपत्र दाखिल किया। जुलाई 2025 से शुरू हुए ट्रायल में 126 तारीखों में 22 से अधिक गवाहों के बयान दर्ज किए गए। चश्मदीद न होने के कारण कैब चालक के बयान, होटल रजिस्टर, सीसीटीवी फुटेज, मोबाइल सीडीआर-लोकेशन और फॉरेंसिक-डीएनए रिपोर्ट अहम साक्ष्य बने। इन्हीं के आधार पर अदालत ने दोनों को दोषी ठहराकर अब फांसी की सजा सुनाई है। नियमानुसार फांसी की सजा पर अमल से पहले हाईकोर्ट से पुष्टि आवश्यक होगी, जबकि दोषियों के पास अपील का कानूनी विकल्प भी उपलब्ध रहेगा।