पंजाब में पराली जलाने से दिल्ली की हवा हुई ज़हरीली, राजनीतिक घमासान तेज़

नई दिल्ली: धान की कटाई के बाद पंजाब के खेतों में पराली (फसल अवशेष) जलाने का सिलसिला लगातार जारी है, जिसके चलते राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली और आस-पास के क्षेत्रों की वायु गुणवत्ता में भारी गिरावट दर्ज की जा रही है। उत्तर-पश्चिमी हवाओं के साथ पंजाब के खेतों से उठने वाला धुंआ दिल्ली-एनसीआर के वायुमंडल में फैल चुका है, जिससे समूचा इलाका एक बार फिर घने स्मॉग और दमघोंटू प्रदूषण की चपेट में आ गया है। इस पर्यावरणीय संकट ने अब एक बड़े राजनीतिक विवाद का रूप ले लिया है।

सियासी आरोप-प्रत्यारोप का दौर शुरू दिल्ली की बिगड़ती आबोहवा के बीच राजनीतिक तकरार चरम पर पहुंच गई है। दिल्ली सरकार के मंत्री मनजिंदर सिंह सिरसा ने पंजाब की आम आदमी पार्टी (आप) सरकार पर गंभीर आरोप लगाते हुए इसे “जानबूझकर लिया गया राजनीतिक बदला” करार दिया है। उन्होंने कहा कि पंजाब प्रशासन की कथित विफलता और उदासीनता का खामियाजा दिल्ली की आम जनता को भुगतना पड़ रहा है, जहां सांस के मरीजों और बुजुर्गों के लिए हालात बेहद चिंताजनक हो चुके हैं।

केंद्र सरकार की सख्ती और निगरानी दूसरी ओर, बढ़ते प्रदूषण को गंभीरता से लेते हुए केंद्र सरकार ने सख्त रुख अख्तियार किया है। केंद्रीय पर्यावरण मंत्रालय ने पंजाब और हरियाणा सहित संबंधित राज्यों को पराली जलाने की घटनाओं पर चौबीसों घंटे निगरानी रखने और कड़े दंडात्मक कदम उठाने के निर्देश दिए हैं। केंद्र ने राज्यों से किसानों को फसल अवशेष प्रबंधन के लिए आधुनिक कृषि यंत्र रियायती दरों पर उपलब्ध कराने और बायो-डीकंपोज़र जैसे सस्ते तथा व्यावहारिक विकल्प तेज़ी से मुहैया कराने का आह्वान किया है।

हॉटस्पॉट्स पर ज़मीनी जांच तेज पंजाब के तरनतारन जैसे संवेदनशील इलाकों (हॉटस्पॉट्स) में प्रशासन ने उड़नदस्तों और नोडल अधिकारियों के ज़रिए ज़मीनी निरीक्षण शुरू कर दिया है। खेतों में सेटेलाइट और ड्रोन से भी आगजनी की निगरानी की जा रही है। अधिकारियों का कहना है कि किसानों को सुपर सीडर, हैप्पी सीडर और बेलर मशीनों के उपयोग के लिए जागरूक किया जा रहा है, ताकि धान की पराली को जलाने के बजाय उसका सही निस्तारण किया जा सके।

हरियाणा और यूपी में सुधार, पंजाब में चुनौती बरकरार रिपोर्टों के मुताबिक, पड़ोसी राज्यों जैसे हरियाणा और उत्तर प्रदेश में प्रभावी निगरानी, समय पर मशीनरी आवंटन और प्रशासनिक सख्ती के कारण पराली जलाने के मामलों में इस वर्ष भारी गिरावट देखी गई है। हालांकि, पंजाब में बड़े पैमाने पर जारी आगजनी अब भी वायु गुणवत्ता प्रबंधन के लिए सबसे बड़ी चुनौती बनी हुई है, जिससे निपटने के लिए सभी पक्षों के बीच त्वरित समन्वय की दरकार है।

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