नई दिल्ली: राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली की अनधिकृत कॉलोनियों में आशियाना बनाकर रह रहे लाखों परिवारों के लिए एक राहत भरी खबर सामने आई है। दिल्ली नगर निगम (MCD) ने ‘प्रधानमंत्री अनधिकृत कॉलोनी आवास अधिकार योजना’ (PM-UDAY) के दायरे में आने वाली 1,511 अनधिकृत कॉलोनियों में संपत्तियों के नियमितीकरण (Regularisation) शुल्क में 75 प्रतिशत तक की भारी छूट देने का आधिकारिक निर्णय लिया है।
इस बड़े फैसले का सीधा लाभ दिल्ली की इन चिन्हित कॉलोनियों में रहने वाली लगभग 44.75 लाख आबादी को मिलेगा। निगम की स्थायी समिति द्वारा स्वीकृत इस प्रस्ताव का मुख्य उद्देश्य लोगों पर पड़ने वाले वित्तीय बोझ को कम करना और नियमितीकरण की सुस्त रफ्तार को गति देना है।
किन शुल्कों पर मिलेगा 75% छूट का लाभ?
MCD द्वारा भवनों और निर्मित क्षेत्र को नियमित करने के लिए मुख्य रूप से चार प्रकार के शुल्क वसूले जाते हैं। निगम ने इन्हीं चिन्हित शुल्कों पर 75% की विशेष कटौती लागू करने का फैसला किया है:
-
क्षतिपूरक विनियामक शुल्क (Compensatory Regulatory Charge): भवन निर्माण नियमों में मिलने वाली छूट के एवज में लगने वाला शुल्क।
-
सी एंड डी अपशिष्ट शुल्क (Construction & Demolition Waste Charge): मलबा प्रबंधन और निस्तारण से जुड़ा शुल्क।
-
विकास शुल्क (Development Charge): क्षेत्र में सड़क, नाली और बुनियादी ढांचे के विकास के लिए लिया जाने वाला चार्ज।
-
प्रशासनिक व आईटी शुल्क (Admin & IT Charges): फाइल प्रोसेसिंग और पोर्टल संचालन से जुड़ा तकनीकी खर्च।
गौरतलब है कि इससे पहले भी 6 अप्रैल 2026 तक के निर्माणों के लिए MCD कई अन्य शुल्कों को पहले ही पूरी तरह समाप्त कर चुकी है, जिनमें परमिट शुल्क, सुधार शुल्क (Betterment Charges), लेवी, अतिरिक्त लेवी, प्लिंथ शुल्क और लेबर सेस शामिल हैं। अब केवल उपरोक्त चार शुल्कों का भुगतान करना होता है, जिन पर 75% तक की राहत मिलेगी।
क्यों पड़ी शुल्क घटाने की जरूरत?
साल 2019 में केंद्र सरकार द्वारा शुरू की गई पीएम-उदय योजना का लक्ष्य निवासियों को मालिकाना हक देना था। हालांकि, शुल्कों की भारी दरों के चलते लोग आगे नहीं आ रहे थे। कई मामलों में 100 वर्ग मीटर के मकान को नियमित कराने का खर्च ही ₹1 लाख से लेकर ₹3-4 लाख तक पहुंच रहा था।
आंकड़ों के मुताबिक, 1,511 कॉलोनियों में अब तक महज 40,000 के आसपास संपत्तियों को ही कन्वेयंस डीड (Conveyance Deed) या ऑथराइजेशन स्लिप जारी हो सकी थी। इस सुस्त प्रक्रिया को देखते हुए निगम ने फीस में कटौती का रास्ता चुना ताकि आम नागरिक कानूनी रूप से अपने मकानों को नियमित करा सकें।
31 अक्टूबर तक का समय, स्वगम पोर्टल से होगा आवेदन
निगम प्रशासन के अनुसार, यह 75% छूट केवल 31 अक्टूबर 2026 तक आवेदन और प्रक्रिया पूरी करने वाले संपत्ति मालिकों के लिए ही प्रभावी रहेगी। यदि भविष्य में सरकार समय सीमा बढ़ाती है, तभी यह लाभ आगे मिल सकेगा।
-
आवेदन प्रक्रिया: संपत्ति मालिक MCD के स्वगम (SWAGAM) पोर्टल के माध्यम से ऑनलाइन आवेदन कर सकते हैं।
-
सेल्फ-असेसमेंट: प्रक्रिया को पारदर्शी और तेज बनाने के लिए निगम ने पैनल में शामिल पंजीकृत प्रोफेशनल्स (आर्किटेक्ट्स/इंजीनियर्स) के जरिए सेल्फ-असेसमेंट की व्यवस्था भी शुरू की है।
संपत्ति मालिक इन बातों का रखें विशेष ध्यान
विशेषज्ञों और निगम अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि संपत्ति का मालिकाना हक प्राप्त करना और मकान के निर्मित ढांचे को नियमित कराना दो अलग-अलग चरण हैं। पीएम-उदय के तहत मिलने वाली कन्वेयंस डीड जमीन/प्रॉपर्टी पर कानूनी हक देती है, जबकि एमसीडी द्वारा बिल्डिंग का नियमितीकरण भविष्य में तोड़फोड़ की कार्रवाई से सुरक्षा और बैंक लोन की सुविधा सुनिश्चित करता है। नागरिक अंतिम तिथि का इंतजार किए बिना अपने दस्तावेजों की जांच कर समय रहते इस छूट का लाभ उठा सकते हैं।