नई दिल्ली। राजधानी के ग्रामीण इलाकों में रहने वाले लाखों लोगों के लिए बड़ी खबर है। दिल्ली नगर निगम (MCD) ने 48 ग्रामीण गांवों को शहरी गांव घोषित करने का फैसला किया है। इस संबंध में प्रस्ताव MCD सदन की बैठक में रखा गया है। मंजूरी के बाद इन गांवों में शहर की तर्ज पर सड़क, नाली, सफाई, जल निकासी, स्ट्रीट लाइट, पेयजल और कचरा प्रबंधन जैसी सुविधाओं का विस्तार किया जाएगा।
यह प्रस्ताव दिल्ली विकास प्राधिकरण (DDA) की सिफारिश पर लाया गया है। DDA ने 20 फरवरी 2026 को हुई बैठक में इन 48 गांवों के शहरीकरण को मंजूरी दी थी और MCD से घोषणा व अधिसूचना की प्रक्रिया शुरू करने को कहा था। इसके बाद MCD की स्थायी समिति ने 1 सितंबर को प्रस्ताव को हरी झंडी दी। अब सदन से पारित होने के बाद इसे दिल्ली सरकार को गजट नोटिफिकेशन के लिए भेजा जाएगा। यह कार्रवाई दिल्ली नगर निगम अधिनियम, 1957 की धारा 507(ए) के तहत होगी, जिसके तहत निगम सरकार की पूर्व अनुमति से किसी भी ग्रामीण क्षेत्र को शहरी क्षेत्र में शामिल कर सकता है।
ये गांव आउटर नॉर्थ, नॉर्थ, नॉर्थ-ईस्ट, नॉर्थ-वेस्ट, साउथ, साउथ-वेस्ट और साउथ-ईस्ट जिलों में फैले हैं। इनमें सबसे अधिक गांव साउथ-वेस्ट जोन के हैं। योजना जोन P-II, O, N, P-I, M, E, J, L, K-II और G के अंतर्गत आते हैं। प्रमुख गांवों में पल्ला, सिंघोला, बाकोली, मुंगेशपुर, निजामपुर, औचंदी, शाहपुर गढ़ी, टटेसर, झटीकरा, कंगनहेरी, रावता, ढांसा, छावला, बिंदापुर, सभापुर, जगतपुर, चिल्ला, बदरपुर खादर, फतेहपुर बेरी और चंदन होला शामिल हैं। MCD का कहना है कि कई गांव पहले से ही शहरी आबादी से सटे हैं और व्यवहार में शहर जैसा स्वरूप ले चुके हैं।
48 गांवों की अंतिम अधिकृत सूची MCD सदन से पारित होकर दिल्ली सरकार के गजट नोटिफिकेशन के बाद ही फाइनल होगी। अभी अखबारों में 42-44 नाम ही विस्तार से प्रकाशित हुए हैं, पूरी 48 की सूची नोटिफिकेशन में आएगी।
शहरी दर्जा मिलने के बाद इन इलाकों का विकास दिल्ली मास्टर प्लान-2041 और मास्टर प्लान-2047 की रणनीति से जुड़ जाएगा। इसके तहत लैंड पूलिंग, हरित क्षेत्र का विकास, पुराने क्षेत्रों का पुनरुद्धार और ट्रांजिट ओरिएंटेड विकास जैसी योजनाएं लागू हो सकेंगी। सबसे बड़ा लाभ यह होगा कि जमीन के उपयोग और भवन निर्माण पर निगम के नियम लागू होंगे, जिससे अनधिकृत निर्माण पर रोक लगेगी।
MCD अधिकारियों के अनुसार ग्रामीण दर्जे के कारण अब तक इन गांवों में विकास कार्य सीमित थे। शहरीकरण के बाद दिल्ली भूमि सुधार अधिनियम (DLR) हट जाएगा, जमीन लैंड पूलिंग में आ सकेगी, नक्शा पास कराना आसान होगा और संपत्ति की कीमत बढ़ेगी। स्थायी समिति की अध्यक्ष सत्या शर्मा ने कहा कि यह केवल नीतिगत बदलाव नहीं, बल्कि जमीन पर दिखने वाले विकास की ठोस पहल है।