नई दिल्ली: बंगाल की खाड़ी में समुद्री सतह का तापमान 29 डिग्री सेल्सियस तक पहुँचने से चक्रवातों की आवृत्ति में अप्रत्याशित तेजी देखी जा रही है। ‘अर्णब’ तूफान के शांत होने के महज एक हफ्ते के भीतर अब गंभीर चक्रवाती तूफान ‘मुरासु’ ने मौसम का मिजाज पूरी तरह बिगाड़ दिया है। मौसम विभाग के अनुसार, मुरासु तेजी से आंध्र प्रदेश के तट की ओर बढ़ रहा है और इसके सोमवार देर रात 2:30 बजे से मंगलवार तड़के 4:00 बजे के बीच तट से टकराने (लैंडफॉल) की प्रबल संभावना है। इस दौरान 120 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से विनाशकारी हवाएं चलने की आशंका है।
दक्षिणी राज्यों में सबसे अधिक खतरा
यद्यपि मुरासु में हवा की गति अर्णब की तुलना में थोड़ी कम आंकी गई है, लेकिन इसका भौगोलिक प्रभाव अधिक विस्तृत रहने वाला है। सबसे भीषण मार आंध्र प्रदेश और उत्तरी तमिलनाडु पर पड़ने की संभावना है। आंध्र प्रदेश के तटीय क्षेत्रों और रायलसीमा में मूसलाधार बारिश की चेतावनी जारी की गई है। इसके अलावा तेलंगाना, कर्नाटक और केरल के कुछ हिस्सों में 70 किमी प्रति घंटे की झोंकेदार हवाओं के साथ भारी बारिश का अनुमान है।
मध्य भारत तक फैलेगा चक्रवात का असर
लैंडफॉल के बाद भले ही यह चक्रवात धीरे-धीरे कमजोर पड़ेगा, लेकिन इसकी अवशेष नमी अगले कुछ दिनों तक देश के बड़े हिस्से को प्रभावित करेगी। ओडिशा और छत्तीसगढ़ में तीन नवंबर से अगले दो दिनों तक तेज वर्षा की संभावना है। इसके साथ ही मध्य प्रदेश के दक्षिणी इलाकों तक बादलों की आवाजाही और रुक-रुक कर बारिश का दायरा फैलेगा। पूर्वी भारत से लेकर उत्तर प्रदेश के कुछ हिस्सों में भी आंशिक रूप से बादल छाए रह सकते हैं।
उत्तर भारत में शुष्क मौसम और सर्दी की दस्तक
उत्तर भारत पर इस तूफान का कोई सीधा प्रभाव नहीं पड़ेगा। दिल्ली, पंजाब, हरियाणा, राजस्थान, गुजरात और उत्तर प्रदेश के अधिकांश जिलों में मौसम पूरी तरह शुष्क बना रहेगा। इसी बीच पहाड़ों पर सक्रिय हो रहे पश्चिमी विक्षोभ के असर से जम्मू-कश्मीर में बारिश और बर्फबारी हो सकती है। मैदानी इलाकों में दिन में तेज धूप खिलेगी, जबकि सुबह और रात के पारे में हल्की गिरावट के साथ गुलाबी ठंड का विधिवत आगाज़ होने के संकेत हैं।