गंगोत्री धाम के प्रमुख पड़ाव धराली में सोमवार को भारी बारिश के कारण खीर गंगा नदी में विनाशकारी बाढ़ आ गई। यह घटना उत्तरकाशी जिले के धराली क्षेत्र में हुई, जहां अचानक आई बाढ़ ने पूरे इलाके में तबाही मचा दी है। बाढ़ के कारण कम से कम 20 से 25 होटल और होमस्टे पूरी तरह से तबाह हो गए हैं, जिससे स्थानीय पर्यटन और आवासीय व्यवसाय बुरी तरह प्रभावित हुए हैं। इसके अतिरिक्त, मौके से प्राप्त सूचना के अनुसार, खैर गंगा नदी में फंसे लगभग 10 से 12 मजदूरों के दबे होने की आशंका जताई जा रही है। स्थानीय निवासी और पर्यवेक्षक राजेश पंवार का कहना है कि बाढ़ का कारण ऊपर कहीं से हुई भारी बारिश और बादल फटने को माना जा रहा है, जिसके परिणामस्वरूप नदी का जल स्तर अचानक बढ़ गया और तेज़ बहाव शुरू हो गया।
उत्तराखंड के धराली इलाके में हुई इस प्रकृतिक आपदा के दौरान आसपास के लोग घबराहट और भय के माहौल में आ गए। जब बादल फटा और तेज़ पानी का सैलाब नाले- नालियों में बहने लगा, तो स्थानीय लोग अपने जीवन के जोखिम में डालकर भागने लगे। कई लोगों ने अपने मोबाइल से घटनाओं का वीडियो भी बनाया है, जिनमें हम तबाही और डर का मंजर स्पष्ट देख सकते हैं। ये वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहे हैं और जनता में भय और सहमति का प्रभाव उत्पन्न कर रहे हैं। इस आपदा का मंजर इतना भयावह है कि लोग अपने घरों और होटल्स को छोड़कर सुरक्षित स्थानों की ओर भाग रहे हैं।
उत्तराखंड सरकार और केंद्र सरकार ने इस प्राकृतिक आपदा पर तुरंत संज्ञान लिया है। उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने घटना पर प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए कहा कि यहां भारी बारिश और बादल फटने के कारण जलस्तर में तेजी से बढ़ोतरी हुई है, जिससे बड़ों स्तर पर नुकसान हुआ है। उन्होंने कहा कि जिला प्रशासन, सेना, एनडीआरएफ और एसडीआरएफ की टीमें राहत और बचाव अभियान में जुट गई हैं। साथ ही, केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने भी मुख्यमंत्री से फोन पर बात की और घटनास्थल पर राहत कार्यों को तेज करने का निर्देश दिया है।
उत्तरकाशी के डीएम प्रशांत आर्य ने कहा कि इस हादसे में अब तक चार लोगों के मृत्यु की पुष्टि हुई है, जबकि करीब 50 लोग लापता हैं। राहत कार्यों के तहत मौके पर भारतीय सेना, एनडीआरएफ और एसडीआरएफ की टीमें पहुंच चुकी हैं। मुख्यमंत्री ने आश्वासन दिया है कि प्रभावित लोगों को हर संभव मदद पहुंचेगी। सभी कोशिशें जारी हैं ताकि प्रभावितों को सुरक्षित निकाला जाए और नुकसान कम किया जाए। यह प्राकृतिक आपदा उत्तराखंड की खूबसूरती के साथ-साथ उसकी सुरक्षा व्यवस्था को भी tests कर रही है।